कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा:- खंड शिक्षा अधिकारी का मुख्य काम स्कूलों का निरीक्षण करना, शिक्षकों के प्रदर्शन पर नजर रखना और शिक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई करना होता है। यदि कोई शिक्षक अपने कर्तव्य में लापरवाही कर रहे है तो बीईओ नियमो के तहत उन पर कार्रवाई कर सकते है। विकासखण्ड पोड़ी उपरोड़ा मे पदस्थ खंड शिक्षाधिकारी के. राजेश्वर दयाल भी अपने दायित्वों का पालन कुछ इसी तर्ज पर कर तो रहे है, लेकिन लापरवाह शिक्षकों के विरुद्ध की जा रही उनकी कार्रवाई इन दिनों खूब चर्चा में है।
बता दें कि बीईओ के.आर. दयाल पोड़ी उपरोड़ा में अपने पदस्थापना काल के बाद से ही शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षकों को अधिक जवाबदेही बनाने को लेकर एक्शन मोड़ में है और स्कूलों में औचक निरीक्षण अभियान चलाकर पदस्थ शिक्षकों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए है। बीईओ श्री दयाल के औचक निरीक्षण में यदि कोई शिक्षक ड्यूटी से नदारद पाया गया तो फौरन नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाता है और जिस एक्शन को लेकर सोशल मीडिया के खबरों में वे खूब छाए रहते है, लेकिन विभागीय तौर पर जो बातें छनकर आ रही है उसके मुताबित बीईओ दयाल साहब शालाओं का औचक निरीक्षण कर और लापरवाह शिक्षकों को नोटिस जारी तो जरूर करते है लेकिन इसके आगे की कार्रवाई के समय वे दयालु बन जाते है। यही कारण है कि साहब की कार्रवाई नोटिस तक ही सीमित होकर रह जाती है। बीईओ श्री दयाल द्वारा अब तक अनेको स्कूलों का औचक निरीक्षण किया गया और लापरवाह शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया परंतु अधिकतर मामले में आगे की कार्रवाई देखने- सुनने को ही नही मिल पायी। ऐसे ही एक मामले में बीईओ के.आर दयाल द्वारा माध्यमिक शाला मनोहरा के शिक्षक जय कुमार पांडेय को नोटिस क्रमांक- 1723 व जारी दिनांक- 01/09/2025 के माध्यम से कहा है कि दिनांक- 01/09/2025 को आपके विद्यालय माध्यमिक शाला मनोहरा का आकस्मित निरीक्षण किया गया है जिसमे यह ज्ञात हुआ कि आप कभी- कभार शाला में उपस्थित होते है, आपकी उपस्थिति अनियमित है। बच्चों से अध्यापन संबंधी चर्चा में बताया गया कि गणित विषय की पढ़ाई तीनो कक्षा में नही हो रही है। समय सारिणी अनुसार तीनो कक्षा में गणित विषय का अध्यापन आपके द्वारा कराया जाना है, जो आपके द्वारा नही पढ़ाया जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि आप बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे है। जबकि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि संकुल समन्वयक को प्रति दिवस तीन कालखंड पढ़ाने के पश्चात ही संकुल के अन्य शालाओं का मॉनिटरिंग किया जाना है। आपका यह कृत्य शासकीय कार्य के प्रति घोर लापरवाही एवं स्वेच्छारिता को दर्शाता है जो संकुल समन्वयक पद के विपरीत है तथा उच्च कार्यालय के आदेशों का स्पष्ट उल्लंघन है जो कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के विरुद्ध है। अतः पत्र प्राप्ति के 02 दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण अधोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष उपस्थित होकर प्रस्तुत करें। जवाब संतोषप्रद नही पाए जाने पर आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु उच्च कार्यालय को पत्र प्रेषित किया जावेगा, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी आपकी होगी..। जिसकी प्रतिलिपि जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा को सादर सूचनार्थ और संकुल प्राचार्य शासकीय हाईस्कूल पचरा को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित बताया गया है।
आपको बता दें कि बीईओ द्वारा शिक्षक को जारी नोटिस के मामले तो सार्वजनिक हुआ किन्तु संबंधित शिक्षक का जवाब आज तलक सामने नही आ पाया। वहीं शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार शिक्षक जय कुमार पांडेय द्वारा प्रस्तुत किये गए स्पष्टीकरण में दो- तीन दिन में माध्यमिक स्तर के तीनों कक्षाओं के गणित विषय का अध्यापन पूर्ण कराने संबंधित अपना जवाब प्रस्तुत किया है। अब यह जवाब तो गले से नही उतर रही और न ही संतोषप्रद लग रही, क्योंकि तीन कक्षाओं के कई दिनों से पिछड़े अध्यापन कार्य एक- दो दिन में आखिर कैसे पूरा किया जा सकता है? फिर भी बीईओ ने जवाब संतोषप्रद माना। कहीं ऐसा तो नही की नोटिस की आड़ में वसूली का खेल चल रहा हो? खैर जो भी हो लेकिन कहा जा रहा है कि इन दिनों स्कूल शिक्षा विभाग में लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई का दबाव बनाकर वसूली करने की योजना पर काम हो रहा है। जिला स्तर के अधिकारी केवल एयर कंडीशनर कमरे में बैठकर शिक्षा व्यवस्था की योजनाएं बनाने में मस्त है और जमीनी स्तर पर इसका अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी उठाने वाले नियमों की धज्जियां उड़ाने में लगे है। आलम यह है कि शिक्षक वर्ग जेबें ढीली करके शिक्षण कार्य के बजाय गैर शिक्षकीय कार्य मे मशगूल होने लगे है। जिससे स्कूल की गुणवत्ता का स्तर और बच्चों की पढ़ाई निम्न कगार पर जा रहा है।




